अलसाई याद



सिरहाने पड़ी कुछ अलसाई यादों ने करवट ली
धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई
तुम सो तो नहीं गई
मैं थोडा मुस्कुराई
मैंने कहा कैसे हो सकता है
तू बार बार करवट लेगी तो मुझे कैसे नींद आएगी...
याद मुस्कुराई बोली चल साथ सोते हैं नींद में ख्वाब को पिरोते हैं
मैं बोली रहने दो हकीकत से मेरा वास्ता हो चुका है
मैंने करवट ली और फुसफुसाते हुए याद से कहा
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September 14, 2012 · Delhi · 

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