क्या कभी सोचा है?????

पिछले १५-२० दिनो से मन बहुत  उदास हो गया है वृद्ध लोगों कि हालत और खबरें सुन कर| 
चाहे वो वृन्दावन की मरी हुई वृद्ध महिलाओं कि दुर्दशा कि खबर हो या मीना  जो कि मध्यमवर्गीय घरो मे खाना बनाती  हैं कि आंखों देखी सच्चाई| जब उसने बताया कि एक घर में बूढी माताजी को खाने के लिए तरसाया जाता है और एक घर मे बूढी माँ के लिए एक कमरे का मकान किराए पर लिया गया है चारपाई और नर्स रख कर छोड़ दिया गया है | माँ को देखने भी कोई नहीं जाता है | 
मेरे घर के नीचे अंकल-आन्टी अकेले रह्ते हैं| आज अंकल गिर गए और काफी देर बाद कालोनी के कुछ लोगों और चौकीदार कि मदद से अस्पताल पंहुचाया गया | अंकल की हालत काफी खराब है | उनका बेटा रात ११ बजे पहुंचा! 
समझ मे नही आता लोग कैसे अमानवी हो सकते है | वो भी अपने माँ और बाप के साथ | कहने के लिए बच्चे पैदा करो | उनकी परवरिश करो | उनको  अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करो. और जब आप लाचार हो जाए तो उनके साथ ऐसा व्यवहार करो..... क्या कभी सोचा है आप भी ऐसी स्थिति मे एक दिन ज़रुर आयेंगे |        
क्या माँ-बाप को अपने साथ किसी भी कीमत मे  नही रखा जा सकता है ? कुछ लोग कहते हैं कि वो साथ नही रहना चाह्ते तो हम क्या करें ? वो हमारे हर चीज मे दखल देते हैं | माना हम सब की अपनी जिन्दगी है लेकिन ये भी तो सोचो कभी उन्होने ने ही हमको चलाना सिखाया था | 
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पूर्णिमा 
जनवरी २०, २०१२ 

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