याद आती है बचपन की गर्मियाँ
जेठ बैसाख की तपिश
11 april 2011
गर्म हवाओं की बयार
गुलमोहर का चटक लाल रंग
याद आती है बचपन की गर्मियों की दोपहर
दादी के घर जाना
छुपन छुपाई खेलते हुए उधमबाजी करना
धूल भारी आँधी
आँधियों के बीच आम के बगीचे में भागना
आम के टीकोरो को बीनना
खट्टे मीठे जुठे सुच्चे स्वाद लेना
छिना झपटी के बीच हाथापाई करना,
रोना धोना रुठाना मनाना
कपड़ों पर टीकोरों के निशान ले कर घर आना
कपड़ों पर टीकोरों के निशान ले कर घर आना
अम्मा का पिटाई करना
गर्मियों की तपती हुई छत
रात मे पूर्वा हवा मे तारे गिनते गिनाते सो जाना
याद आती है बचपन की गर्मियाँ
11 april 2011
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